उद्धरण - 514
यहाँ या मैके में अनेक स्त्रियाँ मिलने आती हैं ऊपर से मैं प्रेम और उत्साह से बोलती हूँ अन्दर से जलन-कुढ़न से बेचैन रहती हूँ। उनकी छोटी-छोटी खुशी उनकी हँसी उनकी तन्दुरुस्ती उनकी सरलता उनकी सुन्दरता कुछ भी तो मुझे सहन नहीं होती। बनावटी आत्मीयता से आरम्भ करके जल्दी ही मैं गम्भीर हो जाती हूँ और कोई-न-कोई बहाना करके वहाँ से उठकर चली जाती हूँ।
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