उद्धरण - 511
एक बड़े सूर्यग्रहण के मौके पर सुप्रसिद्ध दार्शनिक आलडुअस हक्सले काशी में मौजूद थे। उसने देखा कि लाखों लोग गंगाजी में खड़े-खड़े नहा धो रहे थे जप कर रहे थे। खासी सर्दी का दिन था वह। हक्सले ने लोगों से पूछा लोगों ने उन्हें बतलाया कि भगवान् सूर्यनारायण को छूने के लिए म्लेच्छ राहु-केतु दौड़ रहे हैं और भगवान् को इन म्लेच्छों से मोक्ष दिलाने के लिए ये हिन्दू भक्त तपस्या कर रहे हैं। हक्सले ने इस प्रसंग को अपनी किताब में लिखते हुए यह प्रश्न उठाया कि जो लाखों लोग आसमानी सूर्य भगवान् की मुक्ति के लिए इतनी कठोर तपस्या कर सकते हैं वे स्वयम् अपने-आपको ब्रिटिश दासता से मुक्त क्यों नहीं करा पाते?
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