उद्धरण - 509
उसे आज प्रथम बार महसूस हुआ कि उम्र में छोटा होने पर भी वीरेश बड़ा हो गया है और वह भी स्वाभिमान समानता तथा जीवन में कुछ सार्थक करने की बढ़ती हुई इच्छा के साथ। और अब समय गया जब बड़े भाई के नाते वह आश्वस्त और आत्मतुष्ट तानाशाह की लापरवाही के साथ वीरेश को कोई आदेश दे देता या डाँट-फटकार देता था। वह सोचकर दुखी हो गया कि कितना निर्मम है अपने से छोटे निर्बल और आज्ञाकारी से सद्भावना-रहित अलोकतान्त्रिक व्यवहार करना।
Comments
Post a Comment