उद्धरण - 504

मुझे ऐसा लगता है थोड़े-से बचकाने काम करके तुम अपने को देश का बड़ा नेता समझ रहे हो! लेकिन यहाँ आकर मैंने तुम्हारी असलियत देख ली है। घर में लोग जब इतना कष्ट भुगत रहे थे सुरेश दिन-रात उधार-सामान लाने के लिए दुकानों के चक्कर लगा रहा था तुम अपने घमंड में चूर निष्क्रिय बने रहे। देश के लिए काम तो ठीक है मगर क्या घर-परिवार के कष्टों से उदासीन हुआ जा सकता है।

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