उद्धरण - 495

मुंबई को कोई भी पहन सकता है। उसका कोई नाप नहीं है। वह सबको आ जाता है। सिर्फ उसके अनुरूप अपने शरीर और आत्मा को थोड़ा फैलाना-सिकोड़ना पड़ता है। मैं ऐसा करने में कामयाब हो गया था।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549