उद्धरण - 494
तुमने कहा था कि मुझे गहना साड़ी कुछ भी नहीं चाहिए। और यह भी कि मैं ही तुम्हारा गहना और साड़ी हूँ। मुझे ऐसी बातों से सख्त चिढ़ है। वे औरतें मुझे पसन्द हैं जो हबककर खाती हैं। बढ़िया से बढ़िया पहनती हैं। किसी का अन्याय बरदाशत नहीं करती हैं। अपने हक के लिए लड़ती हैं। मैं वह मर्द नहीं हूँ जो औरत जलील करते हैं। मैं तुम्हारे पास हूँ तो अपने हक के लिए लड़ती हैं। मैं वह मर्द नहीं हूँ तो तुम्हें मुझसे खूब साड़ी-गहना लेना चाहिए।
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