उद्धरण - 493

बऊ तुम्हारे पास कितने औजार है? स्वंय को ही चीरने को तर्क-वितर्क दया क्षमा की धारदार आरी लिये फिरती हो और समय असमय चलाने लगती हो अपनी ही छाती पर। बेहिचक अपने ही खंड-खंड करती रहती हो बऊ

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