उद्धरण - 490

धीरे-धीरे स्निग्धा भी समझ गयी कि पति गपशप करने की या दिल की बात बताने-पूछने की या साथ हँसने-रोने की, घूमने-फिरने की, सोने-सपने देखने की, सोचने-योजना बनाने की या अपना सबकुछ बाँटने की चीज़ नहीं होती। ऐसे उसके शहर के पति होते होंगे। यह महानगर का पति है।

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