उद्धरण - 483

जा विकरम की बहू को यह बात कौन याद दिवाए कि तुम्हारे बाप जू हमारी हैसियत के मुकाबले क्या थे? कोरे फाटकदार। हती कोई बराबरी? फिर भी विकरम के दादा जू ने बचन दिया था सो मोहरें-अशरफियन की थैली लिये लोग लौटा दिए। और ऐसे ही सिकिल-सूरत में विकरम के मुकाबले पासंग नही हैं मकरन्द की मताई।

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