उद्धरण - 481

तुम फाहशा किसको कहोगे खत्रा? हमारे हिन्दुस्तान को छोड़कर अब हर सभ्य देश में कवाँरे युवक-युवतियों का मुक्त प्रेम समाज द्वारा स्वीकार किया जाने लगा है बहुत सी लड़कियों के जीवन में एक से अधिक प्रेमी आ जाते हैं। लेकिन यहाँ उन्हें कोई फाहशा नहीं कहता जब तक कि वे अति की सीमा को पार न कर जायँ। यहाँ बहुत से ऐसे जोड़े रहते हैं जिनकी आपस में किसी प्रकार की शादी नहीं हुई। कोई भी ऐसे लोगों के बदचलन नहीं कहता।

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