उद्धरण - 473

पर हम तुम्हारे अहसान के बदले में हल्के-ही-हल्के मान रहे हैं खुद को। हर हाल में हल्के। ........ उपकार का भार तो धन-माया के वजन से भारी होता है हमारे विचार में। रही विकरम की बहू की बात सो अब फैसला उसके हाथ में है। बेटीवाला विवेक-बुद्धि और व्यवहार पर रहता है।

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