उद्धरण - 469

अपने उद्गम स्थान पर पतली धार वाली टेढ़ी-मेढ़ी उछलती-कूदती छिपती-उमगती सरिता ने एक लीक पकड़ ली जो गहरी और चौड़ी होती गई दो तटों की बाँहों की सुरक्षा के बीच आबद्ध होकर भी गतिमान।

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