उद्धरण - 462
तड़ाक। बंटी के गाल पर एक चाँटा पड़ा तो सारा कमरा जैसे घूम गया। बंटी ऊपर से नीचे तक काँप गया। चोट ज़्यादा नहीं थी पर ममी के हाथ का चाँटा और वह भी सबके बीच में जोत और अमि के सामने। वह रोया नहीं पर उसकी आँखों से जैसे चिनगारियाँ निकलने लगीं। .........गुस्सा दुख अपमान भूख और डर ने मिलकर बंटी को भीतर से बिलकुल थका दिया। थक ही नहीं गया जैसे भीतर से कहीं बिलकुल सुन्न हो गया। अब तो न गुस्सा आ रहा है न रोना।
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