उद्धरण - 459

कनिया भाभी का ठीक कहना है कि स्त्री का प्रेम सृष्टि की इच्छा और नियति से जुड़ा है इसलिए उसकी स्थिति मर्द के प्यार की तरह आधी-अधूरी नहीं होती है। वह अपनी असलियत को छिपा नहीं सकती चाहे सकारात्मक हो या नकारात्मक।

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