उद्धरण - 456
और उसकी मानसिक प्रतिक्रिया यह हुई कि वह शहीद की भाँति घर त्यागकर माता का मोह त्यागकर उपस्थित समाज की दृष्टि में बोलती अपील की करूणा को अनदेखी करके तेजी से गली के मुहाने की ओर बढ़ गया। रमेश की माता की करूण पुकारें गली में खड़े हुए बब्बू भैया की आवाज़ें उस गली की दीवालों से टकराकर गुँजती हुई रमेश के मन में उसके संकल्प को दृढ़ता प्रदान करने लगीं।
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