उद्धरण - 452

तुम्हें मेरी बिलकुल परवाह नहीं रह गई है। मत करो मेरा कोई भी काम। बस डॉक्टर साहब के पास बैठकर चाय पियो। तुम्हारा क्या है सज़ा तो मुझे मिलेगी। मैं अब स्कूल ही नहीं जाऊँगा कभी नहीं जाऊँगा कभी भी ..... पहले ममी का चेहरा ममी की आँखें देखकर ही ममी के मन की बात जान लेता था ममी की खु़शी ममी की उदासी ममी की नाराज़गी सब उसे पता था। पर अब?

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