उद्धरण - 451
सब साली भारतीय संस्कृति है। हम लोगों को सोलह दूनी आठ पढ़ाने के लिए भारतीय संस्कृति और अपने लिए हराम की तनख्वाह और ऐश। मैं तो सच कहता हूँ रमेश कि ऐसे प्रोफे़सरों कि लिए अमरीका की ’कू क्लक्स क्लान’ जैसी संस्था खोलनी चाहिए। किसी लौंडियाबाज़ की खोपड़ी तोड़कर यूनिवर्सिटी के लॉन में उसकी लाश फेंक दी जाय किसी को पेड़ से उल्टा टाँग दिया जाय किसी के नाक-कान काटे जायँ- तब ये लोग काबू मे आएँगे। साले हम पर ’इंडिसिप्लिन’ का चार्ज लगाते हैं और आप ही मोस्ट इण्डिसिप्लिन्ड स्वार्थी और कमीने हैं।
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