उद्धरण - 447
और तब पहली बार बंटी ने महसूस किया कि समझदार बनना कितना मुश्किल है। ममी की नज़रों में समझकर होकर रहने का मतलब है कुछ भी मत कहो, कुछ भी मत करो। दूध उसे पसंद नहीं फिर भी बिना चूँ किए पी लेता है। जो खाने को दो खा लेता है। जो कुछ करने को कहा जाता है कर लेता है।
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