उद्धरण - 446
हमारी नई पीढी में इस समय दो तरह के लोग है। एक सक्रिय महत्त्वाकांक्षी है और दूसरे हताकांक्षी। महत्त्वाकांक्षियों की सक्रियता आजकल (या शायद सदा) खुशामद तिकड़म दाँवपेंच और स्वार्थ भरी बदमाशियों की दिशा में रही है। उनकी आकांक्षा का महत्व केवल उसी तक सीमित है- और इसलिए वह वर्ग अकेली लड़त लेता है। और दूसरा हताकांक्षी वर्ग कोल्हू का बैल है। उसे जो चाहे अपने काम में जोत ले जहाँ चाहे जोत ले। उसके अरमान शुरू ही से कभी उमंग नहीं पाते।
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