उद्धरण - 442

मन को मारना भी तपस्या करना हो सकता है क्या? मन तो आजकल वह भी कितना मारता है अपना तो क्या वह भी तपस्या कर रहा है? एक अजीब-सी पुलक उसके मन में जागी। एक अजीब-सा आत्मविश्वास। कौन ख़ुश होगा उसकी तपस्या से?

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