उद्धरण - 441

उमेश महत्त्वाकांक्षी है मगर कमजोर भी है। जी हुजूरी उसकी नीति नहीं उसका चरित्र है। मैं जानता हूँ मन से उसने यह अवश्य चाहा होगा कि ऐसे शुभ अवसर पर हम सब उसके साथ हों। मगर ससुर साहब ने उत्सव की कोई योजना निश्चित कर दी होगी

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