उद्धरण - 439

हाँ ए बिटिया चालीस से आगे के दूल्हा को ‘खुरनाठ’ कहते हैं। इस उमिर में शरीर और मुँह फैल जाता है। चेहरे पर एक-दो गहरी लकीरें दिखाई देने लगती हैं जैसे कच्ची सड़क पर बैलगाड़ी की लीक। अधपके मूँछों के बाल झाडू की सींकों की तरह फरकने लगते हैं। वह बुढ़ौती को छिपाने के लिए इतर-फुलेल खिजाब लगाता है। उसके गले में बलगम भर जाता है और वह हमेशा खुर-खुर किए रहता है।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549