उद्धरण - 438
तुम इतनी टूटी हुई तुम्हारी यह दीनता बऊ पर वार करती होगी? हो सकता है बऊ को लगता हो ऐसा। महसूस करती हों वे कचोट लेकिन वे क्यों नहीं समझती कि ऐसा भी तो हो सकता है कि बोल तुम्हारें हो शब्द किसी और के!......देह तुम्हारी रहती हो अकड़ किसी दूसरे की! चाल तुम्हारी अवश्य होगी दर्प-घमंड उधार का होता होगा अम्मा।
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