उद्धरण - 433

अम्मा। बऊ जाकर क्या क्या कहती थीं? लोगों से क्या क्या सुनती हूँ पर मैं कैसे मानूँ अम्मा कि तुम सम्पन्न घराने की छत्रछाया में हो। रानी महारानियों की तरह रहती हो। अपने-आप चुना था तुमने यह जीवन। स्वंय चली गई थीं सब कुछ त्यागकर।

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