उद्धरण - 416

सात्विकता, इन्सानियत, शुभ काम की भावना ने नशे की तरह चढ़कर सारे वातावरण ही को मयखाना बना दिया।....ऐसे महान् जन-संकट के समय बहुतों के दिलों में कर्त्तव्य और इन्सानियत की दिव्य ज्योति जगमगा उठी थी। इस ज्योति के टार्च समान गोल दायरे के इर्द-गिर्द संकीर्ण स्वार्थों का अँधेरा उस समय भी ज्यों का त्यों मौजूद रहा।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549