उद्धरण - 413

इतनी बेजाँ बात पर अड़कर क्या सिद्ध करना चाहते हैं गोविन्दसिंह? यही कि खोखली होती है आत्मा? पोला-ही-पोला है करूणा और हमदर्दी का रिस्ता।

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