उद्धरण - 412

पागल कहीं का! इतना बड़ा होकर रोता है ममी के लिए। तो अँसुवाई आँखों से ही बंटी हँस दिया। भीतर ही भीतर बड़ी शरम महसूस हुई अपने ऊपर। सचमुच उसे इतनी जल्दी रोना नहीं चाहिए। बच्चे रोया करते हैं बात-बात पर तो वह तो अब बड़ा हो गया है। अब कभी नहीं रोएगा इस तरह।

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