उद्धरण - 405

पहली लड़ाई से ही जैसे हर अगली लड़ाई में चीखने- चिल्लाने और हाथ-पैर चलाने का हमें लाइसेंस मिल गया था। जरा़ जऱा सी बात पर हम आपस में उलझ पड़ते, एक दूसरे की तकलीफों के बारे में सोचने की बजाय सिर्फ अपनी इच्छाओं-सुविधाओं के बारे में सोचने लगते, एक दूसरे को जली-कटी सुनाने लगते और हाथपाई करने लगते।

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