उद्धरण - 403

हमारा यही दोष है कि इन लोगों की तरह लाभ-हानि का हिसाब नहीं धँसता हमारे मगज में। यही खोट है कि गणित नहीं आने दिया जीवन में। उन सबको यही दुख है कि इनकी अभिलाखा से अलग है हमारे लाभ की इबारत।

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