उद्धरण - 400
कभी अच्छा मत पहनो कभी अच्छा मत खाओ। खाओ भी तो स्वाद न लो। व्यंजनों का स्वादिष्ट लगना पाप है। किसी अच्छी चीज़ का अच्छा लगना गुनाह है, कुफ्र है। किसी भी अच्छी चीज़ में, मसलन संगीत में, चित्रकला में, अभिनय में, नृत्य में, स्थापत्य में, यहाँ तक कि सुन्दर प्राकृतिक दृश्य में, किसी भी चीज़ में अगर तुम्हें मजा आता है तो यह मनुष्यता के प्रति एक घोर अपराध है। क्योंकि ये चीज़े सबको सुलभ नहीं।
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