उद्धरण - 398
बिन्नू अपने मन में तनिक भी भय मत लाना। झिझक-हिचक में मत रहना। जो हुआ उसे भूल जाना। डर मत मानना कभी। जिन्दगानी में इतनी बड़ी जिन्दगी में अच्छा बुरा घट जाता है बिटिया उसके कारन मन में गाँठ लगाने से क्या फायदा? जो तुमने किया ही नहीं उसके लिए अपने को दोसी क्यों मानना?
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