उद्धरण - 396

शुरू में लगता है कि व्यभिचार से अहम् को एक विद्रोह भरी खुशी मिलती है पर झीनी झीनी समझ फिर यह बतलाने लगती है कि इसका अहम् से सीधा या गहरा सम्बन्ध नहीं होता। यह केवल उसका एक ऊपरी विकार मात्र है एक मानसिक उत्पात है।

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