उद्धरण - 393
बिन्नू सौ बातों की एक बात है नाते-सम्बन्ध का नाम बताएँ गढ़ें सो बेकार है। साँचा नाता तो प्यास और पानी का है।....खोट तो हमारे मतारी-बाप का था। वे गरीब काहे को थे? गरीब थे तो अपनी बिटिया के लिए सुख के सपने काहे देखे? सपने देखे ही थे तो मान-परतिष्ठावाले घर के लिए उतना दहेज काहे नहीं जुटा पाए? काहे नहीं कर पाए घर-वर की इच्छा पूरन?
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