उद्धरण - 387

पर मैं तुम्हें तकलीफ़ देने के लिए बंटी को अलग नहीं करना चाहता बिना बंटी को अलग किए भी तुम सोच सको। तो अच्छा है। पर इतना जरूर कहूँगा कि तुम केवल बंटी की माँ ही नहीं हो इसलिए केवल बंटी की माँ की तरह ही मत जियो शकुन की तरह भी जियो।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549