उद्धरण - 382

ज़रा आज से आठ-नौ साल बाद की बात सोचो जब बंटी की अपनी जि़दगी होगी अपने स्वतत्र संबंध होंगे अपनी इच्छाएँ और अपनी महत्वाकांक्षाएँ होंगी तब तुम्हारा कितना अस्तित्व होगा उसकी ज़िदगी में?

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