उद्धरण - 376

प्रेम के ऐसे रूप को मैं एकांत ही की चीज़ मानती हूँ बिलकुल पूजा ऐसी ही चीज़ को मानती हूँ और उसका दिखावा मुझे बेहद-बेहद बुरा लगता है- उतना ही बुरा जितना कि नये हिन्दुस्तान के अपने इन पिछड़े क्षेत्रों के अन्दर मुझे लड़के-लड़कियों की दोस्ती छिपाना या फौरन ही पाप-चेतना के साथ जोड़ देना बुरा लगता है।

Comments

Popular posts from this blog

उद्धरण - 797

उद्धरण - 549