उद्धरण - 362
सामनेवाले को पराजित करने के लिए जैसा सायाम और सन्नद्ध जीवन उसे जीना पड़ा उसने उसे खुद ही पराजित कर दिया। सामनेवाला व्यक्ति तो पता नहीं कब परिदृश्य से हट भी गया और वह आज तक उसी मुद्रा में उसी स्थिति में खड़ी है- साँस रोके दम साधे घुटी-घुटी और कृत्रिम!
Comments
Post a Comment