उद्धरण - 356

सेठों रिश्वतखोरों की बात छोड़ दो वरना किसका अच्छा दिन जा रहा है आज के जमाने में? घर-घर मटियारे चूल्हे हैं अपनी अपनी धोतियो में सभी नंगे है।

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