उद्धरण - 351

दुनिया के किसी भी पिछड़े-से-पिछडे देश के नेताओं में शायद ही इतने विचारशून्य राजनीतिक गुटबाज़ मिलें। इस संकीर्ण स्वार्थ भरी दम्भ भरी गुटबाजियों में पड़कर पढ़ा लिखा और चतुर-भोला सामान्य सभ्य सुप्रतिष्ठित जन समझ से नासमझी की ओर आँखें मीचे बढ़ा जा रहा है।

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