उद्धरण - 331

यह अन्तर्जातीय प्रेम विवाह पहले रूढ़ियों के प्रति बग़ावत करके मनुष्य को संकीर्णता से व्यापकता के दायरे में ले जाता है लेकिन विवाह के बाद यही संकीर्ण जातिगत चेतना पति-पत्नी के बीच कभी-कभी बेतुकी और चुभन भरी स्थितियाँ ला देती है।

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