उद्धरण - 329

एक ही घर की दो जनी! एक ही ड्योढ़ी की सास बहू। ऐसा दुसमनाई! ऐसी गहरी खुन्दक! और ऐसी बेरहम दूरी! लो अब कहाँ जावें। कितै करें निरवाह? कौन गुफा में दुका देवें मन्दा कों? कौन सुरंग से निकर जायँ कहूँ दूर देस।

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