उद्धरण - 325
साथ रहने लगी एक दिन कॉलेज में इसको देखा। मैली जीन्स, कोल्हापुरी चप्पलें, खादी का कुरता और बगल में झोला, दाढ़ी बढ़ी हुई और लपकते क़दम। हरदम यही। रोज़ यही। कभी कुरते की जगह टीशर्ट आ जाती, पर दूसरे दिन कुरता। सर्दियों में स्वेटर मफलर या कोट। मैं देख रही थी। मैं लगातर चार साल देखती रही।
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