उद्धरण - 324

शकील हमारे गाँव में भी सब आदमी माता के मन्दिर के पास लैन बनाकर बैठे होंगे। सब बिटियाँ भुँजरियाँ बाँट रही होगी। कका भइया दादा सब पाँव छू रहे होंगे उनके। ससुरालों से आ गई होंगी सब बिटियाँ

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