उद्धरण - 323
तुम स्त्री हो अपने होने की गारिमा से भरी। तुम स्वंय मूर्तिमान गरिमा हो। पाप-पुण्य की संकुचित परिभाषा से परे तुम संवेदना प्यार और शक्ति का स्त्रोत हो। मैं पुरूष हूँ लम्बे और शक्तिशाली शरीर के बावजूद स्वंय में दुर्बल और चंचल हूँ। निर्मम क्रूर हूँ। मेरे अन्दर न कोई प्रकाश है और न ही मेरा कोई प्रयोजन। मैं अधूरा हूँ और भटक रहा हूँ। मेरा कोई उद्देश्य नहीं और न ही लक्ष्य। यह सब प्राप्त करने मैं तुम्हारे पास आया हूँ जो तुम्हारे पास ही है मेरे पास नहीं।
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