उद्धरण - 315
रुपए के लिए ही अपने शरीर को बेचनेवाली एक वेश्या-पुत्री की रुपयों के लिए ही किसी की विश्वासिनी बनने की यह भावना स्वयं उसकी समझ के परे थी फिर भी उसकी तुलना उस बन्द अँधेरी घुटी-घटी कोठरी से की जा सकती है जिसके फॉफर से अचानक झिर-झिर हवा और रोशनी की कोई लकीर आ जाए।
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