उद्धरण - 303

रोटी, कपड़ा, आसरा, हम चिल्लाते हैं, ये सब ज़रूरी हैं, निस्सन्देह जीवन के एक स्तर पर ये सब निहायत ज़रूरी हैं लेकिन मानव-जीवन की मौलिक प्रतिज्ञा ये नहीं हैं; वह है केवल मानव का अदम्य, अटूट संकल्प.............

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