उद्धरण - 97

मैं परम्परा द्रोही नहीं हूँ, न भारत द्वेषी ही हूँ । ना ही मैं निराशावादी हूँ । और तात्कालिक लाभ या उपयोगिता या सफलता के नाम पर नैतिक मूल्यों की उपेक्षा मुझे कभी अभीष्ट नहीं रही- मेरा आग्रह सदैव अवसर वाद के विरुद्ध और नैतिक मूल्य की रक्षा का रहा है ।

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