उद्धरण - 96

महाजन की धमकियाँ और कारिन्दे की बोलियाँ इस समारोह में बाधा नहीं डाल सकतीं। घर में अनाज नहीं है, देह पर कपड़े नहीं है, गाँठ में पैसे नहीं है, कोई परवाह नहीं। जीवन की आनन्दवृति तो दबायी नहीं जा सकती, हँसे बिना तो जिया नहीं जा सकता।

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