उद्धरण - 93
डरपोक प्रणियों में सत्य भी गूँगा हो जाता है। वही सीमेण्ट, जो ईंट पर चढ़कर पत्थर हो जाता है, मिट्टी पर चढ़ा दिया जाय, तो मिट्टी हो जायेगा। गोबर की निर्भीक स्पष्टवादिता ने उस अनीत के बख्तर को बेध डाला, जिससे सज्जित होकर नोखेराम की दुर्बल आत्मा अपने को शक्तिमान समझ रही थी।
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