उद्धरण - 90

अपना-अपना भला-बुरा सब समझते हैं। आदमी इसलिए नहीं जनम लेता कि सारी उम्र तपस्या करता रहे और एक दिन खाली हाथ मर जाय। सब जिन्दगी का कुछ सुख चाहते हैं, सबकी लालसा होती है कि हाथ में चार पैसे हों।

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